नज़र
तुम्हे देखा है जबसे मेरे दिल में ये करार आया है
वर्ष १९९२ में रचित
तुम्हे देखा है जबसे मेरे दिल में ये करार आया है
शायद इसलिए मालिक ने तुझे मेरे लिए बनाया है
माथे पे सिन्दूरी सूरत तेरी काया कोमल कंचन है
नैन तेरे कजरारे हैं ऐ सनम झील के क्या कहने है
चले तुम चाल शराबी तेरी गाल गुलाब की पंखुरी है
जुल्फें घटा सावन की ऐ सनम बदल क्या कहने है
ओठों की रंग गुलाबी तेरी बातें शायर की ग़ज़ल है
माथे पे लाल बिंदियाँ ऐ सनम तारे के क्या कहने है
दिल में चपल चंचलता फूल सा तेरी नाजुक कमर है
चंदन सा तेरा बदन ऐ सनम खुश्बू के क्या कहने है
माथे पे सिन्दूरी सूरत तेरी काया कोमल कंचन है
नैन तेरे कजरारे हैं ऐ सनम झील के क्या कहने है
चले तुम चाल शराबी तेरी गाल गुलाब की पंखुरी है
जुल्फें घटा सावन की ऐ सनम बदल क्या कहने है
ओठों की रंग गुलाबी तेरी बातें शायर की ग़ज़ल है
माथे पे लाल बिंदियाँ ऐ सनम तारे के क्या कहने है
दिल में चपल चंचलता फूल सा तेरी नाजुक कमर है
चंदन सा तेरा बदन ऐ सनम खुश्बू के क्या कहने है
वर्ष १९९२ में रचित
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें