रविवार, 25 जनवरी 2009

राज़

जख्मों से भरी इस जिन्दगी में 
इश्क की दास्तान छुपी हैं 
चाँदनी इश्क के बारे में मत पूछ 
अभी सारी रात बाकी है 

मेरे मुस्कुराते अक्स के पीछे 
अश्कों की सैलाब छुपी है 
फिजाओं मुझे मदहोश न करना 
अभी सारी ज़ज्बात बाकी है 

उनके यादों के साये में 
जीन्दगी की तमन्नाएँ छुपी है 
घटाओं मेरे हाल पर तरस खाना
अभी बरसात बाकी है 

वफ़ा को बदनाम कर वो 
आज गैर की बाँहों में छुपी है 
मैय्यत पर कल सेहरा सजाना 
अभी अरमानो की बारात बाकी है 

उसके हाथों के सुर्ख हीना में 
मेरे कतरों की आह छुपी है 
निकाह की रात मुबारक 
अभी क़यामत की मुलाकात बाकी है
वर्ष १९९४ में लिखित

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