जख्मों से भरी इस जिन्दगी में
इश्क की दास्तान छुपी हैं
चाँदनी इश्क के बारे में मत पूछ
अभी सारी रात बाकी है
मेरे मुस्कुराते अक्स के पीछे
अश्कों की सैलाब छुपी है
फिजाओं मुझे मदहोश न करना
अभी सारी ज़ज्बात बाकी है
उनके यादों के साये में
जीन्दगी की तमन्नाएँ छुपी है
घटाओं मेरे हाल पर तरस खाना
अभी बरसात बाकी है
वफ़ा को बदनाम कर वो
आज गैर की बाँहों में छुपी है
मैय्यत पर कल सेहरा सजाना
अभी अरमानो की बारात बाकी है
उसके हाथों के सुर्ख हीना में
मेरे कतरों की आह छुपी है
निकाह की रात मुबारक
अभी क़यामत की मुलाकात बाकी है
वर्ष १९९४ में लिखित
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