मेरे महबूब में क्या
बात है, कलाम में बताई नहीं जाती
सनम की जितनी तारीफ
करूँ, लवों में समायी नहीं जाती
आफ़ताब में महताब में
उनका ही सब नूर-ऐ-जमाल है
उनमे कौन सा रंग है,
रंगीन कमान में समायी नहीं जाती
शहर में सहरा में उनका
ही सब खाक-ऐ-महाल है
उनके कितने चेहरे हैं,
दुनिया-ऐ-शबीह में उतारी नहीं जाती
लहर में बहर में उनका
ही सब ग़ज़ल-ऐ-महफ़िल है
उनमे कितनी तरन्नुम
है, मकामात में समायी नहीं जाती
ज़हरा में शज़रा में
उनका ही सब रूह-ऐ- कमाल है
उनमे कितनी अबीर है,
कभी नफ़स में छुपाई नहीं जाती
मंजर में पसमंजर में
उनका ही सब नज़र-ऐ-कामिल है
उनमे कितने इल्म है,
कभी तफ्सील से सुनाई नहीं जाती
कलाम-Words, आफ़ताब-
Sun, महताब- Moon, नूर-ऐ-जमाल- Beautiful light
रंगीन कमान-
Rainbow, सहरा-Desert, शबीह-Portrait, बहर- River, तरन्नुम- Rythem
मकामात- Music
scale, ज़हरा- Flower, शज़रा- Trees, कमाल-Perfection,
अबीर- Fragnance, मंजर-Perspective,
पसमंजर- Background, कामिल-Perfection
इल्म-Knowledge तफ्सील-Detail
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