पिया चैत के पुरवा बयार से चुन्दरिया लहर उठे
रामा कोयली के
बोलियाँ से जिया में कसक उठे
डोली में लिए
अमिया महुआ चैता कहार चहक उठे
फगुआ कहत कब
बसंत में चैती बयार दमक उठे
रूनी झुनि बाजे पायल जब कमरिया लचक उठे
रूनी झुनि बाजे पायल जब कमरिया लचक उठे
कमानी अखियों
के प्रेमतीर से कलेजा धड़क उठे
अमिया और महूलिया के खूश्बू से भोर महक उठे
जब गेहूँ काटे जाये सांवरिया मनवा में दहक उठे
सेजिया के सलबट में खोयी देहिया झनक उठे
परदेशिया बालम
तेरे आने से तन मन बहक उठे
सैयां
संग सेजिया में रात भर चूड़ियां खनक उठे
बिजली करड़कने से रतियाँ में चोलिया मसक उठे
बिजली करड़कने से रतियाँ में चोलिया मसक उठे
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