बुधवार, 18 मार्च 2015

चैती बयार


पिया चैत के पुरवा बयार से चुन्दरिया लहर उठे
रामा कोयली के बोलियाँ से जिया में कसक उठे

डोली में लिए अमिया महुआ चैता कहार चहक उठे
फगुआ कहत कब बसंत में  चैती बयार दमक उठे

रूनी झुनि बाजे पायल  जब कमरिया लचक उठे
कमानी अखियों के प्रेमतीर से कलेजा धड़क उठे 

अमिया और महूलिया के खूश्बू से भोर महक उठे
जब गेहूँ काटे जाये सांवरिया मनवा में दहक उठे

सेजिया के  सलबट  में खोयी  देहिया झनक उठे 
परदेशिया बालम तेरे आने से  तन मन बहक उठे

सैयां  संग सेजिया में रात भर चूड़ियां  खनक उठे
बिजली करड़कने से रतियाँ में चोलिया मसक उठे



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