रविवार, 24 दिसंबर 2017

#वजूद

एक चिंगारी हूँ 
नहीं मिटेगी रंगे दमक मेरी
गर बुझ भी गया 
एक दिन सितारों में समा जाऊँगा।

वो अमरवेल हूँ 

नहीं मिटेगी वजूद मेरी
गर जल भी गया 
एक दिन शाख में लिपट जाऊँगा।

वो गुले गुलशन हूँ 

नहीं मिटेगी खूशबू मेरी
गर टूट भी गया 
एक दिन गुल-ऐ-आब में महक जाऊंगा।

वो सूर साज़ हूँ 

नहीं मिटेगी खनक मेरी
गर बेताल भी हुए
 एक दिन झरनों में समा जाऊंगा।

एक कातिब हूँ 

नहीं मिटेगी हस्ती मेरी
गर मिट भी गया
एक दिन हिन्द-ए-दस्तावेज में रह जाऊँगा।