एक चिंगारी हूँ
नहीं मिटेगी रंगे दमक मेरी
वो अमरवेल हूँ
नहीं मिटेगी वजूद मेरी
वो गुले गुलशन हूँ
नहीं मिटेगी खूशबू मेरी
वो सूर साज़ हूँ
नहीं मिटेगी खनक मेरी
एक कातिब हूँ
नहीं मिटेगी हस्ती मेरी
नहीं मिटेगी रंगे दमक मेरी
गर बुझ भी गया
एक दिन सितारों में समा जाऊँगा।
एक दिन सितारों में समा जाऊँगा।
वो अमरवेल हूँ
नहीं मिटेगी वजूद मेरी
गर जल भी गया
एक दिन शाख में लिपट जाऊँगा।
एक दिन शाख में लिपट जाऊँगा।
वो गुले गुलशन हूँ
नहीं मिटेगी खूशबू मेरी
गर टूट भी गया
एक दिन गुल-ऐ-आब में महक जाऊंगा।
एक दिन गुल-ऐ-आब में महक जाऊंगा।
वो सूर साज़ हूँ
नहीं मिटेगी खनक मेरी
गर बेताल भी
हुए
एक दिन झरनों में समा जाऊंगा।
एक दिन झरनों में समा जाऊंगा।
एक कातिब हूँ
नहीं मिटेगी हस्ती मेरी
गर मिट भी गया
एक दिन हिन्द-ए-दस्तावेज में रह जाऊँगा।
एक दिन हिन्द-ए-दस्तावेज में रह जाऊँगा।
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