शनिवार, 28 दिसंबर 2019

असास-ऐ-इश्क

सर्द सुबह में आज कोहरा घना हैं
सफेद रंग से आबो फ़िज़ा सना हैं।

राह में रहबर आज भले ही न मिले
लेकिन किसने कहा चलना मना है।

न टूटेगी ये हमारी इश्के मनाज़िल
दिलों के राब्ता से आशियां बना है।






रूहों का मरासिम सदियों में नहीं
तेरे सोहबत में  चंद लम्हें  फ़ना हैं।

जुदा है रंग-ओ-बू लेकिन राहें एक 
असासों के दम पे आबाद तना है I


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