सर्द सुबह में आज कोहरा घना हैं
सफेद रंग से आबो फ़िज़ा सना हैं।
राह में रहबर आज भले ही न मिले
लेकिन किसने कहा चलना मना है।
न टूटेगी ये हमारी इश्के मनाज़िल
दिलों के राब्ता से आशियां बना है।
रूहों का मरासिम सदियों में नहीं
तेरे सोहबत में चंद लम्हें फ़ना हैं।
जुदा है रंग-ओ-बू लेकिन राहें एक
असासों के दम पे आबाद तना है I
सफेद रंग से आबो फ़िज़ा सना हैं।
राह में रहबर आज भले ही न मिले
लेकिन किसने कहा चलना मना है।
न टूटेगी ये हमारी इश्के मनाज़िल
दिलों के राब्ता से आशियां बना है।
रूहों का मरासिम सदियों में नहीं
तेरे सोहबत में चंद लम्हें फ़ना हैं।
जुदा है रंग-ओ-बू लेकिन राहें एक
असासों के दम पे आबाद तना है I
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