शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

चर्चा

हसीं रुखसार में शबनमी आब मिलतें है 
चर्चा है तेरे लबों पे सुर्ख गुलाब मिलते हैं

फलक झुक जाता है अपनी घटा लेकर
चर्चा है तेरे जुल्फों में स्याह सहाब मिलते हैं

साजिन्दगी करती है कोयल तेरी बातों से 
चर्चा है तेरे सांसों में ताने रुबाब मिलते है

चलती फिरती मयखाना है तेरी नम आँखे 
चर्चा है तेरे चश्मों में सफ़ेद शराब मिलतें हैं

सिजदा करतें हैं इस शहर के मासूम दीवाने
चर्चा है तेरे कूचों में इश्के किताब मिलतें हैं

कभी न गया कोई मायूस इस कशाने से 
चर्चा है तेरे दर पे माकूल हिसाब मिलते हैं

मुजरिम हो जाते हैं बरी हर इल्ज़ाम से 
चर्चा है तेरे सोहबतों में सवाब मिलते हैं

तिलिस्मी समा डूब जाता है आगोश में
चर्चा है तेरे महफ़िल में सराब मिलतें हैं

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