रविवार, 31 जनवरी 2021

जिंदगी की राह

कहकशां में हर सितारों पे नज़र रखते हैं
जिंदगी तेरी राहों पे जारी सफर रखते हैं

दिलों में तेरी अक्श व लबों पर तेरा नाम
सुबहो शाम और पहर दो पहर रखते है

जुगनुओं से कह दो कि रहे वो औकात में 
दिल में शोला व निगाहों में शरर रखते है 

मंजर और पसमंज़र दोनों है निगाहों में
चमन क्या वो सहरा में भी शज़र रखते है

नेकी की राह में फ़िदा है तुम पर सनम
दिन व रात तेरी जलवों में असर रखते है

मगरिब मशरीक में जहाँ भी हो नुमाया 
पल पल वो तेरी सेहत की खबर रखते हैं 

आब आतिश फ़ज़ाओं में वो दम कहाँ 
हर सूरत में हम अपना खिज़र रखते हैं

जिंदगानी के वास्ते सरमाये हो तंग जितने 
हाथों में फुलूस नहीं जान जिगर रखते हैं 

परवाज़ लगाते हैं परिंदों जैसे फलक में 
सज़र की तरह मिटटी में जज़र रखते हैं
 
तकरीर करने का कहाँ इल्म नहीं मालूम 
ढाई आखर में कहने का हुनर रखते हैं 

कहकशां (Universe) शरर (Spark/gleam) 
जलवों (Show/splendor) मगरिब (West) 
मशरीक (East) खिज़र (Immortality ) 
फुलूस (Penny/Medieval coin ) जज़र (root) 
तकरीर (Speech) इल्म/हुनर  (Knowledge) 


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