सोमवार, 11 अक्टूबर 2021

आने दो

निग़ाहों में सुर्ख लपटें चिंगारी को आने दो 
वफ़ा भी करूंगा सनम खुमारी को आने दो 

यार कहते हैं कि मोहब्बत गज़ब की बला है 
मान लूंगा लेकिन इस बीमारी को आने दो 

पलकें बिछाए मैं बैठा रहा कल शब भर 
टूट भी जाएगा ऐतवार बेदारी को आने दो 

उम्मीद हैं आएंगे वो मेरे काशाने में एक दिन 
सब्र रखिये जरा मौसमें करारी को आने दो 

दीदार की आरजू में गुज़रे दिन महीने साल 
छोड़ दूंगा इंतज़ार इल्में शुमारी को आने दो

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