पल में ही पल जीने का पहर है
जीवन हरपल अनवरत सफर है
जीवन हरपल अनवरत सफर है
सर्द मौसम में पत्ते तो बिखरते है
बहार की ताक में खड़ा शज़र है
मकाम बदल गया मंजिल नहीं
आँखों मे जज्ब कल का डगर है
उस समंदर में कुछ है हलचल
प्रतिद्वंदी मित्र और वही समर है
होठों में है एक ही मन्त्र प्रतिक्षण
तीन रंगों में लिपता सा ज़िगर है
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