शनिवार, 27 नवंबर 2021

जीस्त

मेरे जीस्त की क्या पहचान है
धूल हवा आतेश आसमान है

उम्र का कारवां चलता है यूंही
जज़्ब जब तक इसमें जान हैं
 
जिस्म एक लिवास का नाम है 
इसके सिवा न कोई निशान हैं

ज़ाहिर है मुक्कमल अफसाना
जब तक रूह तब तक जान है

कितने ग़ाफ़िल है चन्दलोग यहां
जो नहीं है उसका उन्हें गुमान है

ग़ाफ़िलों जाहिलों की क्या कहें
आतेश में मिलने का अरमान है

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