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बुधवार, 21 जुलाई 2021

जान-निसार

ये मिल्लत तुझे हम बेपनाह प्यार करते हैं 
नेकी के राह में हम जान निसार करते है 

किसी के आँखों में कभी न आ जाये नमी
जान का क़तरा क़तरा हम फुवार करते हैं 

तेरा दामन और आसियाना सलामत रहें 
धन दौलत को सदके से  बेज़ार करते  हैं

तुझ से जुदा हमारे जीस्त का वजूद कहाँ 
ये वतन तुझे हम अश्क बेशुमार करते हैं
 
कोई मासूम कोई मजलूम भूखा ना  रहें 
मालिक से यही  हर बार गुहार करते हैं 

संगदिली व तंगदिली से हमें निजात मिले 
आज दिल से इक ऐसा ही करार करते हैं 

ईद सबके घरों में यूँ ही मनाई जाती रहें  
चलो इसके लिए उपाय हज़ार करते हैं 

शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

सलाम

नील के किनारे दिलों में तपिस लगता चलूँ , 
ये शहर के बाशिंदों तुझे सलाम करता चलूँI

बल सादगी और खुशहाली का तराना हमारा,
ये महफ़िल तुझे अपना कलाम सुनाता चलूँI

केशरिया दूधिया हरा रंगों का धरम हमारा,
ये फरिश्तों तुझे हिन्द का पैगाम देता चलूँI

फ़ना हो मुफलिसी नशेमन में खिले बहार,
ये दुनिया तेरे बाबस्ता मक़ाम बनाता चलूँI

नीले आसमान के तले अमन हो पुरनूर,
ये शिहाब रंग जमाल तेरे नाम करता चलूँI