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गुरुवार, 20 नवंबर 2014

प्रेम रंग


जबसे मैं रंगा हूँ तेरे प्रेम रंग में रंग रसिया, 
मेरा तन मन सब  इंद्रधनुषी होने  लगा हैI

जब से मिला है धरकन तेरे सुर में प्रेम पिया,
मध्यम के  बिना सुर सप्तक सजने लगा हैI

जब से चला है तेरे प्रेम का जादू मन माहिया, 
मद्यपान  बिना मेरा सुध बुध खोने लगा हैI 

जब से मिला है तेरा पथ साथ में सोने साथिया,
अब चाँद और धरा की दूरी सिमटने लगा हैI

जब से मन मगन है तेरे धुन में संग सांवरिया, 
साज़ सरगम के बिना कदम थिरकने लगा हैI

जब से मिला है तेरे रूह में साँस वन बसिया, 
चंपा चमेली खिले बिना सुबास होने लगा हैI