शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

सलाम

नील के किनारे दिलों में तपिस लगता चलूँ , 
ये शहर के बाशिंदों तुझे सलाम करता चलूँI

बल सादगी और खुशहाली का तराना हमारा,
ये महफ़िल तुझे अपना कलाम सुनाता चलूँI

केशरिया दूधिया हरा रंगों का धरम हमारा,
ये फरिश्तों तुझे हिन्द का पैगाम देता चलूँI

फ़ना हो मुफलिसी नशेमन में खिले बहार,
ये दुनिया तेरे बाबस्ता मक़ाम बनाता चलूँI

नीले आसमान के तले अमन हो पुरनूर,
ये शिहाब रंग जमाल तेरे नाम करता चलूँI

गुरुवार, 20 नवंबर 2014

प्रेम रंग


जबसे मैं रंगा हूँ तेरे प्रेम रंग में रंग रसिया, 
मेरा तन मन सब  इंद्रधनुषी होने  लगा हैI

जब से मिला है धरकन तेरे सुर में प्रेम पिया,
मध्यम के  बिना सुर सप्तक सजने लगा हैI

जब से चला है तेरे प्रेम का जादू मन माहिया, 
मद्यपान  बिना मेरा सुध बुध खोने लगा हैI 

जब से मिला है तेरा पथ साथ में सोने साथिया,
अब चाँद और धरा की दूरी सिमटने लगा हैI

जब से मन मगन है तेरे धुन में संग सांवरिया, 
साज़ सरगम के बिना कदम थिरकने लगा हैI

जब से मिला है तेरे रूह में साँस वन बसिया, 
चंपा चमेली खिले बिना सुबास होने लगा हैI 


शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

मंगल मिलन



अग्नि शिखा पर आरोहित हमारा मंगलमयी तिरंगा
मंगलाचारण किये धूम मचाता कूंच किया मंगल पथ
शुभ संकल्प से जगमगाता और प्रकाश पर्व मनाता
यशस्वी वैज्ञानिकों ने किया इसे प्रशस्त पथ

तीन शतक दिवसीय ६५ करोड़ किमी लम्बी मार्ग में
ना थके ना रुके अनवरत संकल्पित लक्ष्य के साथ
मंगल की चाह में मंगल से मंगल मिलन हेतु
गणन मनन करता रवि से पोषित ये हिन्द रथ

संसार का संशय मिटा जब मेरा आज एक ज्वाला फूटा
तेरे सीमा में प्रविष्ट होने को है मंगल मेरा सफल रथ
प्रत्येक सातवें गण का सन्देश ला रहा हूँ धरा से
चुम्बन को आतुर है आगवानी करने आ जाना पार्थ

धन्य हुआ वैज्ञानिक तेरा  ज्ञान विज्ञान का अभियान
रवि संदेशा लाया  तेरा लाल है मंगल की लाली के साथ
अद्भुत था क्षण प्रतिक्षण साक्षी बना ये विश्व विशाल
मंगलमयी सतरंगी धरा के दूत किया अपना हाथ लाल 

रविवार, 27 जुलाई 2014

मिल्लत व उख़ूवत

आलम-ऐ-इंसान के दरम्यां मिल्लत व उख़ूवत बनी रहेंI
आकबत की खबर रब जाने दुनिया-ऐ- हकीकत बनी रहेंI

ईमान का तकाज़ा है सबों की खुशुशी शक्शियत बनी रहेंI
दीन-ऐ-नाम चाहे हम जो भीं दें उनकी अहलियत बनी रहेंI

रंग खुशबू जमीं फलक से गुलज़ार ये कायनात बनी रहेंI

अर्शोफर्श में अख्लाख़े आईन हो उनकी करामात बनी रहेंI

सदियों से ऐ पैगाम सरेआम है इंसानी फितरत बनी रहेंI
मंजिल- ऐ- जानिब मुख्तलिफ है उनकी रहमत बनी रहें I

दिल शफ़ाफ़ हो आइने की तरफ कौमी ज़ज़्बात बनी रहेंI
अज़ल पुरनूर हो शिहाब का उनकी अज़ालियत बनी रहेंI



[दरम्यां- between, उख़ूवत- Brotherhood, खुशुशी-specific
आकबत- Ressurection, फितरत- Nature, तकाज़ा-Reminder
कायनात- Universe अर्शोफर्श- Heaven and earth
करामात-Magic, आईन-Code, अख़लाख-moral, शिहाब-Shooting star
मुख्तलिफ- Distinct, अहलियत- Worthiness, अज़ालियत- immortal]

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

सांवरिया

विरहों के अग्नि में लपटी है वर्षों से मेरी काया
दादुर ताल लगाए सांवरिया सावनी रस घोल दो

माघ की शीत वसन में सिमटी है तेरी माया
कोयल कुहुँ बोले  सांवरिया बसंती रंग  घोल दो

अंधियारी दिवा में बिलखती है तेरी किशलया
पपीहरा पीयूँ  पुकारे सांवरिया अधर पट खोल दो

मधुर मिलन की आस में तरसती है तेरी छाया
भँवरे गुं गुं पुकारती सांवरिया प्रेम गीत मोल दो

तीव्र सप्तक   लय में थिरकती है तेरी सौम्या

घुँघरू झनन बाजे  सांवरिया पंचम भाषा बोल दो

हमारी मोहब्बत


हमारी सोहबत का कारवां बढ़ेगा 

पलकों के गुलाबी होने तक

ऐ मोहब्बत परवान चढ़ेगी अपनी 

अलकों के सफ़ेद होने तक

 

अभी आगाज़-ऐ-रौशनी  है इस मशरिक में, 

मेरे हमदम ऐ हमनवा 

हमारी चाहतों का शरारा सयान होगा 

दामिनी के चमकने तक

 

अभी आगाज-ऐ- शमा  है इस अंजुमन में, 

मेरे हमसफ़र ऐ दिलनशीं

हमारी आहटों का पयाम बयान होगा 

क़दमों के खनकने तक

 

अभी आगाज़-ऐ-रबी फ़सल है इस साल में, 

मेरे  हमराह ऐ दिलकशीं

हमारी आदतों का सूरत जवान होगा 

गुलों के महकने तक

 

अभी आग़ाज़-ऐ- अज़ल है इस हयात  

में, मेरे हरदम ऐ महजबीं

हमारी राहतों का अपना जहान होगा 

सांसो के लरज़ने तक

 

[सोहबत-Company, परवान-Climax, अलक- Hair,  शरारा-Spark, दामिनी-Lightning

मशरिक-East,  पयाम- Message, शमा –Candle,  अंजुमन-Distinct gathering

रबी-Spring,  फ़सल-Season, अज़ल-Death,  हयात-Life]  

मेरे महबूब

मेरे महबूब में क्या बात है, कलाम में बताई नहीं जाती
सनम की जितनी तारीफ करूँ, लवों में समायी नहीं जाती

आफ़ताब में महताब में उनका ही सब  नूर-ऐ-जमाल है
उनमे कौन सा रंग है, रंगीन कमान में समायी नहीं जाती

शहर में सहरा में उनका ही सब  खाक-ऐ-महाल है
उनके कितने चेहरे हैं, दुनिया-ऐ-शबीह में उतारी नहीं जाती

लहर में बहर में उनका ही सब ग़ज़ल-ऐ-महफ़िल है
उनमे कितनी तरन्नुम है, मकामात में समायी नहीं जाती

ज़हरा में शज़रा में उनका ही सब  रूह-ऐ- कमाल है
उनमे कितनी अबीर है, कभी नफ़स में छुपाई नहीं जाती

मंजर में पसमंजर में उनका ही सब नज़र-ऐ-कामिल है
उनमे कितने इल्म है, कभी तफ्सील से सुनाई नहीं जाती

कलाम-Words, आफ़ताब- Sun, महताब- Moon, नूर-ऐ-जमाल- Beautiful light
रंगीन कमान- Rainbow, सहरा-Desert, शबीह-Portrait, बहर- River, तरन्नुम- Rythem
मकामात- Music scale, ज़हरा- Flower, शज़रा- Trees, कमाल-Perfection,
अबीर- Fragnance, मंजर-Perspective, पसमंजर- Background, कामिल-Perfection
इल्म-Knowledge तफ्सील-Detail