आरजू है खुदा जीवन में आये बहार नए साल में
नशेमन में हो दौलत और शिफा इस नए साल में।
मिन्नत है ये मालिक से सबके हो सपने साकार
दिलों में शहनाई और
लवों में तराना नए साल में।
बेशकीमती मीना व जवाहिरात
से सजे बाजार
हिन्द में मुफलिसी का अब अंत
हो नए साल में।
आंखों में हो नूर और सुर्ख
हो सबों के रुखसार
मुल्क में मुक्कमल रहे इंसानियत
नए साल में।
इल्तिजा है रब दशहतगर्दी
का बन्द हो कारोबार
अमन का ये मशाल बुलंद हो इस
नए साल में।