बुधवार, 23 सितंबर 2020

हिन्द के नुमाईन्दे

सरहदों के पार भी अपना  मुखतलिफ़ निशाँ होता है
हाथ खाली हो फिर भी वहां एक अपना ज़ुबाँ होता है

जीते -मरते है रोज दर रोज बगैर तमगों  की आस में
अफ्रीका,अमेरिका या जहां भी हमारा मकाँ होता है

हम हिन्दुस्तानियों के नुमाईन्दे हैं आलमी सतह पर
कौमी मुफाद के लिए हमारा हर लम्हा रवाँ होता है

तिरंगा के साये में बनता हमारा मजहब व तहज़ीब
ये जज़्बात महफ़िल में हमारे आँखों से बयाँ होता है

हिन्द हमारे रगों और लबों में हरदम हर मजलिस में
कातिब से सफ़ीर तलक का सफ़र यूँ जवाँ  होता है

शनिवार, 18 अप्रैल 2020

ठहराव

शहर से देहात-ऐ-तलक ये जीवन थम सा गया हैआशियाँ में हयात बर्फ की तरह ज़म सा गया है

बस्ती में इंसानों को मयसर नहीं आब-ओ-दाना मासूमों की बेबसी देखकर आंखे नम सा गया हैं

टूट गयी सब हसरतें व छीन गयी हाथों से निवाले #कोरोना के इस दौड़ में पमालों का दम सा गया है वीरां हुए सब रास्तें और मंज़िलें हुयी अब ओझल जुदा ऐसे हुए सब लगता है कोई हम सा गया है शिफा की उम्मीद में अहाते में कैद व सहमे हम
गुजर रही है ऐ पल जैसे महीनों में रम सा गया है

रविवार, 29 मार्च 2020

हौसला

हौसला रख दोस्त कोरोना का कहर भी देखेंगे
रब ने बख़्शी है उम्र हम उनका नज़र भी देखेंगे।

बेज़ारी के इस दौर में तन्हा तन्हा सब्र से गुजारें
लवों पे दुआ रख दोस्त इसका असर भी देखेंगे।

जुगनू की रौशनी में गुज़र जाएगी दो-चार लम्हें
स्याह शब के सीने से चीरता सा सहर भी देखेंगे।
टूट ही जातें हैं शाख़ों से पत्ते खिज़ा के दौर में
हिम्मत रखिये चमन में बहारे मंज़र भी देखेंगे।
जहां में मातम और खौफ में आज है इंसानियत
रफ्ता रफ्ता कातिल का थमता ज़हर भी देखेंगे।
जब ज़ज़्बात की कश्ती दाल दी हैं तूफान में
उम्मीद रख शहाब समंदर का लहर भी देखेंगे।

शनिवार, 28 दिसंबर 2019

असास-ऐ-इश्क

सर्द सुबह में आज कोहरा घना हैं
सफेद रंग से आबो फ़िज़ा सना हैं।

राह में रहबर आज भले ही न मिले
लेकिन किसने कहा चलना मना है।

न टूटेगी ये हमारी इश्के मनाज़िल
दिलों के राब्ता से आशियां बना है।






रूहों का मरासिम सदियों में नहीं
तेरे सोहबत में  चंद लम्हें  फ़ना हैं।

जुदा है रंग-ओ-बू लेकिन राहें एक 
असासों के दम पे आबाद तना है I


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

खूबसूरत जिंदगानी

गुलों से खूश्बू व झरनों से मौज़ चुराकर देखिये।
इल्तज़ा है तितलियों के रंगों में नहाकर देखिये।

जन्नत की ख्वाहिश में बिता दी हमनें ये उम्र
खूबसूरत है हर लम्हा उसमें उतरकर देखिये।


अंधेरे के साये में क्यों करते हो जाया जिंदगानी
धूप कितनी सुनहरी है उसमें ठहरकर देखिये।

शिक़वे-शिकायत में आज गुमराह इंसानियत
मिलेंगें दोस्त रकीबों के शहर में खोजकर देखिये।

बेबजह गिला व रंजिसे ना रखिये सीने में हुज़ूर
बिखरेगी नूर मेरी आँखों में जरा बसकर देखिये।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

रंगो के तिलिस्म

मगरिब में ढलते रंगो के तिलिस्म में खनक किसका है
ये उड़ते रंगो के सैलाब के  जिस्म में धनक किसका है

कोयल की कूक या आबे बहिश्त से निकलती ये तान
मौशिकी और फ़िज़ां के मक़ामात में झनक किसका है

फ़िज़ां के रुखसार में या अब्र में लिपटी ये चम्पई लेप
रंगो के इस बाजार के कारोबार का भनक किसका है

शहाब के ज़जीरे में नायब रंगों का ये लाज़बाब रक़्स
रूहानी तराने व् दिलक़श बंदिश में छनक किसका है

ये कौन सा रंगसाजी या मुसब्बिर की नामचीन शबीह
शिहाब उफ़क के रुख को रंगने का सनक किसका है 

मंगलवार, 24 सितंबर 2019

अफ़साने

मुख्तलिफ थी कल तक हमारे अफ़साने अब वो तमाम देखते हैं
कल तक चश्में जुस्तजू थी दो  दिलों की अब वो अवाम देखते है

सहर से शामे तलक सीने में उभरता रहा आशना-ए-रोशनाई 
सुर्ख हुए चश्म-ए-समंदर की गहराई, अब वो कलाम देखते हैं



जन्नत की खातिर तिनका तिनका बिखेरा उम्र भर  गुलिश्तां में 
दो गज़ का नशेमन बनाऊं कैसे जान अब  वो क़याम देखते है

अबीर की खवाहिश लिए लूटा दी बहार-ए-गुलशन की खुशबू
खिजां का दौर  इस तरह चला जिंदगी अब वो मशाम देखते है

अजल और मुदाम हुए हमारे दिलों के ये सूफियाना अफ़साने
बदन और रूह का यह  दमाम रिश्ता अब वो पयाम  देखते है

शज़र से टूटते जर्द पत्तों को कहाँ उसकी ये हकीकत मालूम
पुरनूर हो क़मर में रंग जमाल शिहाब अब वो मक़ाम देखते है

[मुख्तलिफ-Specific, चश्में जुस्तजू- dream in eyes, 
आशना-ए-रोशनाई-ink of love, मशाम-Fragrance, शजर-tree, 
जर्द पत्तों- yellow leaves, क़याम-Stay, मुदाम/ दमाम -eternal, 
पयाम-message, क़मर-moon, शिहाब-Shooting star]