हसीं रुखसार में शबनमी आब मिलतें है
चर्चा है तेरे लबों पे सुर्ख गुलाब मिलते हैं
चर्चा है तेरे लबों पे सुर्ख गुलाब मिलते हैं
फलक झुक जाता है अपनी घटा लेकर
चर्चा है तेरे जुल्फों में स्याह सहाब मिलते हैं
साजिन्दगी करती है कोयल तेरी बातों से
चर्चा है तेरे सांसों में ताने रुबाब मिलते है
चलती फिरती मयखाना है तेरी नम आँखे
चर्चा है तेरे चश्मों में सफ़ेद शराब मिलतें हैं
सिजदा करतें हैं इस शहर के मासूम दीवाने
चर्चा है तेरे कूचों में इश्के किताब मिलतें हैं
कभी न गया कोई मायूस इस कशाने से
चर्चा है तेरे दर पे माकूल हिसाब मिलते हैं
मुजरिम हो जाते हैं बरी हर इल्ज़ाम से
चर्चा है तेरे सोहबतों में सवाब मिलते हैं
तिलिस्मी समा डूब जाता है आगोश में
चर्चा है तेरे महफ़िल में सराब मिलतें हैं