वफ़ा भी करूंगा सनम खुमारी को आने दो
यार कहते हैं कि मोहब्बत गज़ब की बला है
मान लूंगा लेकिन इस बीमारी को आने दो
पलकें बिछाए मैं बैठा रहा कल शब भर
टूट भी जाएगा ऐतवार बेदारी को आने दो
उम्मीद हैं आएंगे वो मेरे काशाने में एक दिन
सब्र रखिये जरा मौसमें करारी को आने दो
दीदार की आरजू में गुज़रे दिन महीने साल
छोड़ दूंगा इंतज़ार इल्में शुमारी को आने दो