दिया जलाकर हम तम को भगाये तो बात बने
दीपक में अपने अहम को जलाये तो बात बने
दीपक में अपने अहम को जलाये तो बात बने
साल दर साल से हिन्द में पुरनूर है ईदे दीवाली
अबकी दफा दरद पे मरहम लगाए तो बात बने
अपने अपने अहद में मसरूफ है अब हर कोई
इमरोज़ सीने के ज़म को पिघलाये तो बात बने
धुआँ धुआँ उड़ा था बन्दी में हौसलों के अरमान
इस कोरोना के हर सितम को हताये तो बात बने
देश दुनिया में अमन खुशी का फिर गूँजे तराना
सबके के नयनों के नम को सुखाये तो बात बने