मेरे जीस्त की क्या पहचान है
धूल हवा आतेश आसमान है
धूल हवा आतेश आसमान है
उम्र का कारवां चलता है यूंही
जज़्ब जब तक इसमें जान हैं
जिस्म एक लिवास का नाम है
इसके सिवा न कोई निशान हैं
ज़ाहिर है मुक्कमल अफसाना
जब तक रूह तब तक जान है
कितने ग़ाफ़िल है चन्दलोग यहां
जो नहीं है उसका उन्हें गुमान है
ग़ाफ़िलों जाहिलों की क्या कहें
आतेश में मिलने का अरमान है