मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

तमन्ना-ए-तिरंगा


जश्न मनाने की ख्वाहिश हिन्द भूला ना  पाया
मेरे दोस्त तुम्हारी कोशिशें हमें हिला ना पाया 
  
तुम उम्मीदों के दिए जलाने के लिए बेताब 
हम तेरे उम्मीदों के तेल से तुझे जला दिया  

तक़सीम की  राह चले तुम दिलों में  भरे तेज़ाब 
जो डंक तुमने सहेजे थे उसी ने तुझे रुला दिया 

खेल तुमने खेला सालों से मन में लिए दुहराब
तेरे मकसद को आज ग्यारह ने दहला  दिया 

तमन्ना है इस  तिरंगे की सब हो  कामयाब 
जिसे वक़्त ने नायाब तिरंगा में नहला दिया 


शनिवार, 17 जनवरी 2015

कातिल पुतली


सफेद समंदर में तैरता स्याह छुईमुई कातिल पुतली,
पुरनूर बरसती है दिलों में तेरे नयनों के खुल जाने सेI

आसमान की पेशानी को चूमती हुई ये सुरमई बदली, 
कौंधती है बिजली सांसों में तेरे अलकों के लहराने से I

उफ़क़ में मिलती धरा नभ की ये चम्पई ओंठ रंगीली,
तार झंकृत होते हैं दिलों की तेरे लवों के कंपकंपाने से I

शफ़ाफ़ साक़ी-ए-गुलफाम की मानिंद अलसाई छबीली,
मदहोशी छा जाती हैं फिजां में तेरे जुवां के अंगराने सेI

माघ में शबनमी बूंद में नहाई रात थरथराई  सजीली,
चमन खुल जाती हैं तेरे रुख में हिलकोरे बन जाने से I


शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

सलाम

नील के किनारे दिलों में तपिस लगता चलूँ , 
ये शहर के बाशिंदों तुझे सलाम करता चलूँI

बल सादगी और खुशहाली का तराना हमारा,
ये महफ़िल तुझे अपना कलाम सुनाता चलूँI

केशरिया दूधिया हरा रंगों का धरम हमारा,
ये फरिश्तों तुझे हिन्द का पैगाम देता चलूँI

फ़ना हो मुफलिसी नशेमन में खिले बहार,
ये दुनिया तेरे बाबस्ता मक़ाम बनाता चलूँI

नीले आसमान के तले अमन हो पुरनूर,
ये शिहाब रंग जमाल तेरे नाम करता चलूँI

गुरुवार, 20 नवंबर 2014

प्रेम रंग


जबसे मैं रंगा हूँ तेरे प्रेम रंग में रंग रसिया, 
मेरा तन मन सब  इंद्रधनुषी होने  लगा हैI

जब से मिला है धरकन तेरे सुर में प्रेम पिया,
मध्यम के  बिना सुर सप्तक सजने लगा हैI

जब से चला है तेरे प्रेम का जादू मन माहिया, 
मद्यपान  बिना मेरा सुध बुध खोने लगा हैI 

जब से मिला है तेरा पथ साथ में सोने साथिया,
अब चाँद और धरा की दूरी सिमटने लगा हैI

जब से मन मगन है तेरे धुन में संग सांवरिया, 
साज़ सरगम के बिना कदम थिरकने लगा हैI

जब से मिला है तेरे रूह में साँस वन बसिया, 
चंपा चमेली खिले बिना सुबास होने लगा हैI 


शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

मंगल मिलन



अग्नि शिखा पर आरोहित हमारा मंगलमयी तिरंगा
मंगलाचारण किये धूम मचाता कूंच किया मंगल पथ
शुभ संकल्प से जगमगाता और प्रकाश पर्व मनाता
यशस्वी वैज्ञानिकों ने किया इसे प्रशस्त पथ

तीन शतक दिवसीय ६५ करोड़ किमी लम्बी मार्ग में
ना थके ना रुके अनवरत संकल्पित लक्ष्य के साथ
मंगल की चाह में मंगल से मंगल मिलन हेतु
गणन मनन करता रवि से पोषित ये हिन्द रथ

संसार का संशय मिटा जब मेरा आज एक ज्वाला फूटा
तेरे सीमा में प्रविष्ट होने को है मंगल मेरा सफल रथ
प्रत्येक सातवें गण का सन्देश ला रहा हूँ धरा से
चुम्बन को आतुर है आगवानी करने आ जाना पार्थ

धन्य हुआ वैज्ञानिक तेरा  ज्ञान विज्ञान का अभियान
रवि संदेशा लाया  तेरा लाल है मंगल की लाली के साथ
अद्भुत था क्षण प्रतिक्षण साक्षी बना ये विश्व विशाल
मंगलमयी सतरंगी धरा के दूत किया अपना हाथ लाल 

रविवार, 27 जुलाई 2014

मिल्लत व उख़ूवत

आलम-ऐ-इंसान के दरम्यां मिल्लत व उख़ूवत बनी रहेंI
आकबत की खबर रब जाने दुनिया-ऐ- हकीकत बनी रहेंI

ईमान का तकाज़ा है सबों की खुशुशी शक्शियत बनी रहेंI
दीन-ऐ-नाम चाहे हम जो भीं दें उनकी अहलियत बनी रहेंI

रंग खुशबू जमीं फलक से गुलज़ार ये कायनात बनी रहेंI

अर्शोफर्श में अख्लाख़े आईन हो उनकी करामात बनी रहेंI

सदियों से ऐ पैगाम सरेआम है इंसानी फितरत बनी रहेंI
मंजिल- ऐ- जानिब मुख्तलिफ है उनकी रहमत बनी रहें I

दिल शफ़ाफ़ हो आइने की तरफ कौमी ज़ज़्बात बनी रहेंI
अज़ल पुरनूर हो शिहाब का उनकी अज़ालियत बनी रहेंI



[दरम्यां- between, उख़ूवत- Brotherhood, खुशुशी-specific
आकबत- Ressurection, फितरत- Nature, तकाज़ा-Reminder
कायनात- Universe अर्शोफर्श- Heaven and earth
करामात-Magic, आईन-Code, अख़लाख-moral, शिहाब-Shooting star
मुख्तलिफ- Distinct, अहलियत- Worthiness, अज़ालियत- immortal]

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

सांवरिया

विरहों के अग्नि में लपटी है वर्षों से मेरी काया
दादुर ताल लगाए सांवरिया सावनी रस घोल दो

माघ की शीत वसन में सिमटी है तेरी माया
कोयल कुहुँ बोले  सांवरिया बसंती रंग  घोल दो

अंधियारी दिवा में बिलखती है तेरी किशलया
पपीहरा पीयूँ  पुकारे सांवरिया अधर पट खोल दो

मधुर मिलन की आस में तरसती है तेरी छाया
भँवरे गुं गुं पुकारती सांवरिया प्रेम गीत मोल दो

तीव्र सप्तक   लय में थिरकती है तेरी सौम्या

घुँघरू झनन बाजे  सांवरिया पंचम भाषा बोल दो