बुधवार, 18 मार्च 2015

चैती बयार


पिया चैत के पुरवा बयार से चुन्दरिया लहर उठे
रामा कोयली के बोलियाँ से जिया में कसक उठे

डोली में लिए अमिया महुआ चैता कहार चहक उठे
फगुआ कहत कब बसंत में  चैती बयार दमक उठे

रूनी झुनि बाजे पायल  जब कमरिया लचक उठे
कमानी अखियों के प्रेमतीर से कलेजा धड़क उठे 

अमिया और महूलिया के खूश्बू से भोर महक उठे
जब गेहूँ काटे जाये सांवरिया मनवा में दहक उठे

सेजिया के  सलबट  में खोयी  देहिया झनक उठे 
परदेशिया बालम तेरे आने से  तन मन बहक उठे

सैयां  संग सेजिया में रात भर चूड़ियां  खनक उठे
बिजली करड़कने से रतियाँ में चोलिया मसक उठे



मंगलवार, 3 मार्च 2015

होली के रंग


खेतों में इठलाती बलखाती गेंहूँ की बालियां
झूमती इतराती लहलहाती आम की मंजरियाँ 
सरसों के पीली सेज में मगन प्रकृति रसिया
बसंत श्रृंगार में गुलाबी रंग लगा दे माहियां

अल्हड़ बसंती पवन मदहोश है पिए भंगिया
रंगोंत्सव में चहुँ ओर उमंग में मगन गोपियाँ
मृदंग करताल बीच थिरक रही छम छमियां
लटक मटक चहक के राग सुनावें कोयलियां

चंपा चमेली जूही सब एक रंग है मेरे बगिया
आज पिचकारी से छुट रही इंद्रधनुषी गोलियां
लाल पीला गुलाबी केसरिया से भीगे चुनरिया
सांवरे सलोने अपने ही रंग में रंग दे अंगिया

गुलाबी फुहार में सराबोर बहारों की शोखियाँ
रंगों की रंगत चढ़ी है हर डगर में रंगरेलियां
सुध बुध खोये एक दूसरे को लगाये छतियां
मृदुंग मँजीरा झांझ थाप पे फ़ाग खेले गोरिया

अपने ही धुन में मस्त हैं दीवानो की टोलियां
आज सांसों के लय छंद में घुल जा साथियां
अंग अंग में फाल्गुनी बयार से जले देहिया
निशा में प्रणयी पीया सेज में तोरे निंदिया

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

तमन्ना-ए-तिरंगा


जश्न मनाने की ख्वाहिश हिन्द भूला ना  पाया
मेरे दोस्त तुम्हारी कोशिशें हमें हिला ना पाया 
  
तुम उम्मीदों के दिए जलाने के लिए बेताब 
हम तेरे उम्मीदों के तेल से तुझे जला दिया  

तक़सीम की  राह चले तुम दिलों में  भरे तेज़ाब 
जो डंक तुमने सहेजे थे उसी ने तुझे रुला दिया 

खेल तुमने खेला सालों से मन में लिए दुहराब
तेरे मकसद को आज ग्यारह ने दहला  दिया 

तमन्ना है इस  तिरंगे की सब हो  कामयाब 
जिसे वक़्त ने नायाब तिरंगा में नहला दिया 


शनिवार, 17 जनवरी 2015

कातिल पुतली


सफेद समंदर में तैरता स्याह छुईमुई कातिल पुतली,
पुरनूर बरसती है दिलों में तेरे नयनों के खुल जाने सेI

आसमान की पेशानी को चूमती हुई ये सुरमई बदली, 
कौंधती है बिजली सांसों में तेरे अलकों के लहराने से I

उफ़क़ में मिलती धरा नभ की ये चम्पई ओंठ रंगीली,
तार झंकृत होते हैं दिलों की तेरे लवों के कंपकंपाने से I

शफ़ाफ़ साक़ी-ए-गुलफाम की मानिंद अलसाई छबीली,
मदहोशी छा जाती हैं फिजां में तेरे जुवां के अंगराने सेI

माघ में शबनमी बूंद में नहाई रात थरथराई  सजीली,
चमन खुल जाती हैं तेरे रुख में हिलकोरे बन जाने से I


शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

सलाम

नील के किनारे दिलों में तपिस लगता चलूँ , 
ये शहर के बाशिंदों तुझे सलाम करता चलूँI

बल सादगी और खुशहाली का तराना हमारा,
ये महफ़िल तुझे अपना कलाम सुनाता चलूँI

केशरिया दूधिया हरा रंगों का धरम हमारा,
ये फरिश्तों तुझे हिन्द का पैगाम देता चलूँI

फ़ना हो मुफलिसी नशेमन में खिले बहार,
ये दुनिया तेरे बाबस्ता मक़ाम बनाता चलूँI

नीले आसमान के तले अमन हो पुरनूर,
ये शिहाब रंग जमाल तेरे नाम करता चलूँI

गुरुवार, 20 नवंबर 2014

प्रेम रंग


जबसे मैं रंगा हूँ तेरे प्रेम रंग में रंग रसिया, 
मेरा तन मन सब  इंद्रधनुषी होने  लगा हैI

जब से मिला है धरकन तेरे सुर में प्रेम पिया,
मध्यम के  बिना सुर सप्तक सजने लगा हैI

जब से चला है तेरे प्रेम का जादू मन माहिया, 
मद्यपान  बिना मेरा सुध बुध खोने लगा हैI 

जब से मिला है तेरा पथ साथ में सोने साथिया,
अब चाँद और धरा की दूरी सिमटने लगा हैI

जब से मन मगन है तेरे धुन में संग सांवरिया, 
साज़ सरगम के बिना कदम थिरकने लगा हैI

जब से मिला है तेरे रूह में साँस वन बसिया, 
चंपा चमेली खिले बिना सुबास होने लगा हैI 


शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

मंगल मिलन



अग्नि शिखा पर आरोहित हमारा मंगलमयी तिरंगा
मंगलाचारण किये धूम मचाता कूंच किया मंगल पथ
शुभ संकल्प से जगमगाता और प्रकाश पर्व मनाता
यशस्वी वैज्ञानिकों ने किया इसे प्रशस्त पथ

तीन शतक दिवसीय ६५ करोड़ किमी लम्बी मार्ग में
ना थके ना रुके अनवरत संकल्पित लक्ष्य के साथ
मंगल की चाह में मंगल से मंगल मिलन हेतु
गणन मनन करता रवि से पोषित ये हिन्द रथ

संसार का संशय मिटा जब मेरा आज एक ज्वाला फूटा
तेरे सीमा में प्रविष्ट होने को है मंगल मेरा सफल रथ
प्रत्येक सातवें गण का सन्देश ला रहा हूँ धरा से
चुम्बन को आतुर है आगवानी करने आ जाना पार्थ

धन्य हुआ वैज्ञानिक तेरा  ज्ञान विज्ञान का अभियान
रवि संदेशा लाया  तेरा लाल है मंगल की लाली के साथ
अद्भुत था क्षण प्रतिक्षण साक्षी बना ये विश्व विशाल
मंगलमयी सतरंगी धरा के दूत किया अपना हाथ लाल