दिलबर हम दिल है दिल्ली है हर दिलजान है
गुरबत में या शोहरत में यहीं मेरी पहचान है
गुरबत में या शोहरत में यहीं मेरी पहचान है
अरावली के दामन में छुपा हुआ है कितने राज़
यमुना के अनवरत सफ़र में कैद मेरी जान है
सदियों से बिछती है सियासत की विसात यहीं
तुग़लक़ मुग़ल अंग्रेजों की भी यहीं श्मशान है
छुप न सका सूरत मेरी जुल्म और सितम से
तंगहाली में भी मिट न सका मेरी निशान हैं
सीने में बदस्तूर बसते रहें कारवां दर कारवां
जर्रे जरा में जज्ब यहीं मेरी इश्के ईमान है