एक बार आंखों से आंखे चार कीजिये।
बन जाऊंगा हमसफ़र एतवार कीजिये।
बन जाऊंगा हमसफ़र एतवार कीजिये।
मिट ही जाएंगी फासलें हमारे रास्तों की
एक दफा मेरी जानिब अबसार कीजिये।
रफ्ता रफ्ता क़दम बढ़ायें मकां की तरफ
होगी अपनी मंजिल एक इक़रार कीजिये।
तेरे रुखसार में कितने नूरानी गुल खिलेंगे
अपने जलवों से ये गुंचा गुलज़ार कीजिये।
बनते नहीं अव्वल झरोखें आशियाने में
बुनियाद बन ही रही है इंतज़ार कीजिए।