तरन्नुम ही जिंदगी की अव्वल
शर्त होती है
ये वो तार है जिसे टूटने
पर मौत होती है
तर्रनुम का अहसास हैं सबों
के सांसों में
ये वो क़तरा है जो सबों के
रग़ों में होती है
माकूल वक़्त इश्क की कभी
शर्त नहीं
ये वो जज़्बा है जो हरेक
दिलों में होती है
रूयाँ में खुशफहमी का इलाज़
न शायद
ये वो शब है जिसकी सहर नहीं
होती है
साल से मरासिम का ख़्वाब
नहीं 'शहाब'
मुख़्तसर हर पलों में दिल
फ़ना होती है