शनिवार, 13 अगस्त 2022

जश्ने आज़ादी

ये जश्ने आज़ादी है ये ईदे आज़ादी है
अमृतकाल में झूमता हिन्दे आबादी है

जन गण मन गा रहा सारा जमाना है
आँखों में उम्मीदें है राहें नौ ईरादी है

गंगा यमुनी माटी की ये नई फसल है 
फितरत में जुनून है सीना फौलादी हैं 

केशरिया ईमान है अरमां में सादगी है 
हरे भरे चमन की खुशबू बेमियादी है 

लहरा रहा मुल्क में घर घर में तिरंगा है
दिलों में आज़ादी है लबों पे आज़ादी है

बुधवार, 26 जनवरी 2022

नाज़े जम्हूरियत

होंठों पे कौमी तराने हरदिल में ईमान रखते हैं, 
हमवतन सर पे कफ़न हाथों में जान रखते हैं।

फिरंगी हुकूमत बनकर रह गई तारीख़ के पन्ने
खुदमुख्तारी के दौर में हम एक आईन रखते हैं

लहू के मीरास में न रहा सियासत का ओहदा
आम अवाम सदर बनने  का अरमान रखते हैं।

अलहदा मज़हब जुबान और रिवायत हमारी 
लेकिन हर दिल में एक ही हिंदुस्तान रखते हैं

फख्र है जमहूरियत के सालगिरह के जश्न का
हर दिल व मंजिल पे तिरंगा का निशान रखते हैं