शनिवार, 28 दिसंबर 2019

असास-ऐ-इश्क

सर्द सुबह में आज कोहरा घना हैं
सफेद रंग से आबो फ़िज़ा सना हैं।

राह में रहबर आज भले ही न मिले
लेकिन किसने कहा चलना मना है।

न टूटेगी ये हमारी इश्के मनाज़िल
दिलों के राब्ता से आशियां बना है।






रूहों का मरासिम सदियों में नहीं
तेरे सोहबत में  चंद लम्हें  फ़ना हैं।

जुदा है रंग-ओ-बू लेकिन राहें एक 
असासों के दम पे आबाद तना है I


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

खूबसूरत जिंदगानी

गुलों से खूश्बू व झरनों से मौज़ चुराकर देखिये।
इल्तज़ा है तितलियों के रंगों में नहाकर देखिये।

जन्नत की ख्वाहिश में बिता दी हमनें ये उम्र
खूबसूरत है हर लम्हा उसमें उतरकर देखिये।


अंधेरे के साये में क्यों करते हो जाया जिंदगानी
धूप कितनी सुनहरी है उसमें ठहरकर देखिये।

शिक़वे-शिकायत में आज गुमराह इंसानियत
मिलेंगें दोस्त रकीबों के शहर में खोजकर देखिये।

बेबजह गिला व रंजिसे ना रखिये सीने में हुज़ूर
बिखरेगी नूर मेरी आँखों में जरा बसकर देखिये।