बुधवार, 26 जनवरी 2022

नाज़े जम्हूरियत

होंठों पे कौमी तराने हरदिल में ईमान रखते हैं, 
हमवतन सर पे कफ़न हाथों में जान रखते हैं।

फिरंगी हुकूमत बनकर रह गई तारीख़ के पन्ने
खुदमुख्तारी के दौर में हम एक आईन रखते हैं

लहू के मीरास में न रहा सियासत का ओहदा
आम अवाम सदर बनने  का अरमान रखते हैं।

अलहदा मज़हब जुबान और रिवायत हमारी 
लेकिन हर दिल में एक ही हिंदुस्तान रखते हैं

फख्र है जमहूरियत के सालगिरह के जश्न का
हर दिल व मंजिल पे तिरंगा का निशान रखते हैं