आप मीठे ख्याली खेतों की इक फसल हो
या सांसों से उपजी हुयी इक ग़ज़ल हो
या सांसों से उपजी हुयी इक ग़ज़ल हो
वक़्त गुजरेंगे जैसे हाथों से फिसलते रेत
लेकिन रगों में दौड़ने वाली तुम जल हो
तराने गूजेंगे जैसे पंचम से निकलते गीत
आप खुद में ही मिसरा ऐ बेमिसाल हो
धनक में ना समाने वाली इक रंग नायाब
आप जिस्म और जेहन से परे ख्याल हो
महताब की दमकते नूर क्या औकात
आप कहकशाँ में शिहाब-ए-जमाल हो
[धनक-Rainbow, जेहन -Mind, महताब - Moon,
कहकशाँ - Galaxy, शिहाब - Shooting star, जमाल-Charm/beauty]