मंगलवार, 9 जुलाई 2019

फसल

आप मीठे ख्याली खेतों की इक फसल हो 
या सांसों से उपजी हुयी इक ग़ज़ल हो 

वक़्त गुजरेंगे जैसे हाथों से फिसलते रेत

लेकिन रगों में दौड़ने वाली तुम जल हो 

तराने गूजेंगे जैसे पंचम से निकलते गीत 

आप खुद में ही  मिसरा ऐ बेमिसाल हो

धनक में ना समाने वाली इक रंग नायाब 

आप जिस्म और जेहन से परे ख्याल हो 

महताब की दमकते नूर क्या औकात 

आप कहकशाँ में शिहाब-ए-जमाल  हो 

[धनक-Rainbow, जेहन -Mind, महताब - Moon, 
कहकशाँ - Galaxy, शिहाब - Shooting star, 
जमाल-Charm/beauty]