उतरे हो जुबां में इस कदर कलमा बन गए हो
ठहरे हो सांसों में इस कदर नगमा बन गए हो
ठहरे हो सांसों में इस कदर नगमा बन गए हो
रगों में समाये दुआ हो मेरे मर्ज की हर दवा हो
गुजरे हो नफ़्स में इस कदर नसमा बन गए हो
कुदरत का नेग हो कायनात का एक तारा हो
सुनहरे हो ज़री की तरह सलमा बन गए हो
सर्द रात की तपिश हो शबनमी एक शाम हो
गहरे हो ज़ख्म ये शबभर ज़लमा बन गए हो
गुलों से निकले रंग हो तिश्नगी का एक ढंग हो
संवरे हो तुम इस कदर से बलमा बन गए हो
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