मंगलवार, 3 मार्च 2015

होली के रंग


खेतों में इठलाती बलखाती गेंहूँ की बालियां
झूमती इतराती लहलहाती आम की मंजरियाँ 
सरसों के पीली सेज में मगन प्रकृति रसिया
बसंत श्रृंगार में गुलाबी रंग लगा दे माहियां

अल्हड़ बसंती पवन मदहोश है पिए भंगिया
रंगोंत्सव में चहुँ ओर उमंग में मगन गोपियाँ
मृदंग करताल बीच थिरक रही छम छमियां
लटक मटक चहक के राग सुनावें कोयलियां

चंपा चमेली जूही सब एक रंग है मेरे बगिया
आज पिचकारी से छुट रही इंद्रधनुषी गोलियां
लाल पीला गुलाबी केसरिया से भीगे चुनरिया
सांवरे सलोने अपने ही रंग में रंग दे अंगिया

गुलाबी फुहार में सराबोर बहारों की शोखियाँ
रंगों की रंगत चढ़ी है हर डगर में रंगरेलियां
सुध बुध खोये एक दूसरे को लगाये छतियां
मृदुंग मँजीरा झांझ थाप पे फ़ाग खेले गोरिया

अपने ही धुन में मस्त हैं दीवानो की टोलियां
आज सांसों के लय छंद में घुल जा साथियां
अंग अंग में फाल्गुनी बयार से जले देहिया
निशा में प्रणयी पीया सेज में तोरे निंदिया

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