शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

फ़ना

डूबा डूबा सा रहता हूँ 
पल पल तेरी  निग़ाहों में 
सिमट सिमट सा जाता हूँ 
पल पल तेरी पनाहों में


घुला घुला सा रहता हूँ 
हमदम तेरी आहों में

खोया खोया सा जाता हूँ 
हरदम तेरी बाँहों में


बिखरा बिखरा सा रहता हूँ
रहबर  तेरी राहों में

महक महक सा जाता हूँ
हम दम तेरी चाहों में

सहमा सहमा सा रहता हूँ
हमदम तेरी विरहों में
बँधा बँधा सा जाता हूँ 
हमसफ़र  तेरी गिरहों में 

संवरा संवरा सा रहता हूँ 
सनम तेरी शबीहों में
फ़ना फ़ना हो  जाता हूँ
दिलबर तेरी रूहों में 


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