हमारी सोहबत का कारवां बढ़ेगा
पलकों के गुलाबी होने तक
ऐ मोहब्बत परवान चढ़ेगी अपनी
अलकों के सफ़ेद होने तक
अभी आगाज़-ऐ-रौशनी है इस मशरिक में,
मेरे हमदम ऐ हमनवा
हमारी चाहतों का शरारा सयान होगा
दामिनी के चमकने तक
अभी आगाज-ऐ- शमा है इस अंजुमन में,
मेरे हमसफ़र ऐ दिलनशीं
हमारी आहटों का पयाम बयान होगा
क़दमों के खनकने तक
अभी आगाज़-ऐ-रबी फ़सल है इस साल में,
मेरे हमराह ऐ दिलकशीं
हमारी आदतों का सूरत जवान होगा
गुलों के महकने तक
अभी आग़ाज़-ऐ- अज़ल है इस हयात
में, मेरे हरदम ऐ महजबीं
हमारी राहतों का अपना जहान होगा
सांसो के लरज़ने तक
[सोहबत-Company,
परवान-Climax, अलक- Hair, शरारा-Spark, दामिनी-Lightning
मशरिक-East, पयाम-
Message, शमा –Candle, अंजुमन-Distinct gathering
रबी-Spring, फ़सल-Season,
अज़ल-Death, हयात-Life]
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें