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के देखो सनम खुली क़िताब हूँ
मैं बेहद बेमिसाल और बेहसाब हूँ
मैं बेहद बेमिसाल और बेहसाब हूँ
चश्में हटाकर देखिए मेरी रंगत को
मैं लालासाँ लबरेज़ व लाजवाब हूँ
तनाफुस से भी खुश्बू भर जाएगी
मैं गुल गुलबार और गुले- ख्वाब हूँ
घर कर जाऊंगा तेरी अल्फाजों में
मैं जूनूनी जांबाज़ जमीनीजनाब हूँ
फज़ाओं में शबनम के ताजग़ी में
मैं शबेसहर में शुमार शामे शराब हूँ
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