ये मिल्लत तुझे हम बेपनाह प्यार करते हैं
नेकी के राह में हम जान निसार करते है
नेकी के राह में हम जान निसार करते है
किसी के आँखों में कभी न आ जाये नमी
जान का क़तरा क़तरा हम फुवार करते हैं
तेरा दामन और आसियाना सलामत रहें
धन दौलत को सदके से बेज़ार करते हैं
तुझ से जुदा हमारे जीस्त का वजूद कहाँ
ये वतन तुझे हम अश्क बेशुमार करते हैं
कोई मासूम कोई मजलूम भूखा ना रहें
मालिक से यही हर बार गुहार करते हैं
संगदिली व तंगदिली से हमें निजात मिले
आज दिल से इक ऐसा ही करार करते हैं
ईद सबके घरों में यूँ ही मनाई जाती रहें
चलो इसके लिए उपाय हज़ार करते हैं
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