बुधवार, 22 दिसंबर 2021

इरादा

तंग राह में भी इरादा बढ़ने का रखते हैं
हौसला नायाब पुतला गढ़ने का रखते हैं

आंखों की जुबानी की कसम मेरे दोस्त
हुनर खामोशियों को पढ़ने का रखते है

दिल्ली के ईमारते मीनार क्या है हुज़ूर
जज्बा हिमालय पर चढ़ने का रखते हैं

रक़ाबत में ज़रा सा जर्रा न दूँ नज़राने में 
वफ़ा में जज्बा नीलम मढ़ने का रखते हैं

कदम रखता हूँ अपनी जमीन की हद में 
सोच चाँद सितारों का गढ़ने का रखते हैं 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें