तंग राह में भी इरादा बढ़ने का रखते हैं
हौसला नायाब पुतला गढ़ने का रखते हैं
हौसला नायाब पुतला गढ़ने का रखते हैं
आंखों की जुबानी की कसम मेरे दोस्त
हुनर खामोशियों को पढ़ने का रखते है
दिल्ली के ईमारते मीनार क्या है हुज़ूर
जज्बा हिमालय पर चढ़ने का रखते हैं
रक़ाबत में ज़रा सा जर्रा न दूँ नज़राने में
वफ़ा में जज्बा नीलम मढ़ने का रखते हैं
कदम रखता हूँ अपनी जमीन की हद में
सोच चाँद सितारों का गढ़ने का रखते हैं
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