सोमवार, 27 दिसंबर 2021

लम्हां लम्हां

एक दिन ये बेमियादी शब गुज़रे
आरजू है खुदा ये ब-सबब गुज़रे

ख्वाहिश नहीं सालों में बसर की
दो चार दिन सही बा अदब गुज़रे

सहर की चाह में मुन्तज़िर दिल
फुरसत के सानिया गज़ब गुज़रे

ख़ुशी में हो चाहे ग़म में परेशान
तेरी निगाहों में कुछ अजब गुज़रे

गुजिस्ता सालों से उम्दा गुजरें
इमसाल में अरबों खरब मिले 
 
अबकी दफा नए साल में दोस्त
लम्हां लम्हां फ़र्त-ए-तरब गुज़रे


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