रविवार, 9 जुलाई 2023

झीलमिल हसरतें

तेरी इन निग़ाहों में मंजिल रख गए
तेरी सांसों में हम जां दिल रख गए

सुर्ख़ लबों को चुमने की बेताबी में
रुख पर आशना के तिल रख गए

स्याह घनेरे गेसुओं की जंजीरों में 
काली घटा ने अपने ज़िल रख गए 

हुए दीवाने कितने तेरी सोहबत में
शायर भी अपनी शेरदिल रख गए

हुए हैं अपने सितारों का चलन एक
नैनों में हसरतें झिलमिल रख गए

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