अमन से सजाके एक पयाम लाया हूँ।
हिन्द से तेरे लिये एक सलाम लाया हूँ।
हिन्द से तेरे लिये एक सलाम लाया हूँ।
हर गुलशन में खिले रंग बिरंगे कलियाँ
सरहदों पे यारी का एक पैगाम लाया हूँ
बर्बाद होते हैं आशियाने हर यलगार में,
खत्म हो रंजिशे ऐसा एक क़याम लाया हूँ
आलमी कुनबा फ़लसफ़ा के हम वारिस
फ़हमदारी का नया एक कलाम लाया हूँ
हमारे नयनों में फिर से पुरनूर हो बहार
शिहाब सुकूं से भरा एक मकाम लाया हूँ
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