शनिवार, 24 जनवरी 2009

इंतजार




इंतजार

मेरी आशिकी की इल्तिजा है कोई ख्वाबों के आशियाने में आए
इंतजार के लम्हें जवां है कोई मेरे पलकों के सामियाने में आए

बादे  सहर ने आवाज़ दी है कोई सावन के महीने में आए
बहुत करार है नफ़्स में कोई हमराह दिल के सकिने में आए

अश्कों की जाम पेशेखिदमत है कोई नैनों के पैमाने में आए
बहुत सरुर है जिंदगी में कोई जान के इस मयखाने में आए

मुझे एक अक्श का इंतजार है कोई तक़दीर के आईने में आए
बहुत तन्हाई है चितवन में कोई पहलू के काशाने  में आए

दिल की ऐ महफ़िल सजी है कोई मेरे सांसो के तराने में आए
बहुत आग है इस जिगर में कोई शिहाब के अफसाने में आए

अक्टूबर २००६ में रचित

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